Sunday, July 03, 2011

गुप्त नवरात्रि में बोलें यह अद्भुत देवी मंत्र

धार्मिक दृष्टि से हम सभी जानते हैं कि नवरात्रि देवी स्मरण से शक्ति साधना की शुभ घड़ी है। दरअसल, इस शक्ति साधना के पीछे छुपा व्यावहारिक पक्ष यह है कि नवरात्रि का समय मौसम के बदलाव का होता है। आयुर्वेद के मुताबिक इस बदलाव से जहां शरीर में वात, पित्त, कफ में दोष पैदा होते हैं, वहीं बाहरी वातावरण में रोगाणु। जो अनेक बीमारियों का कारण बनते हैं। सुखी-स्वस्थ जीवन के लिये इनसे बचाव बहुत जरूरी है।

नवरात्रि के विशेष काल में देवी उपासना के माध्यम से खान-पान, रहन-सहन और देव स्मरण में अपनाने गए संयम और अनुशासन तन व मन को शक्ति और ऊर्जा देते हैं। जिससे इंसान निरोगी होकर लंबी आयु और सुख प्राप्त करता है।

यही कारण है कि व्यावहारिक उपाय के साथ धार्मिक उपायों को जोड़कर शास्त्रों में देवी उपासना के कुछ विशेष मंत्रों का स्मरण सामान्य ही नहीं गंभीर रोगों की पीड़ा को दूर करने वाला माना गया है।

इन रोगनाशक मंत्रों का नवरात्रि के विशेष काल में ध्यान अच्छी सेहत के लिये बहुत ही असरदार माना गया है। जानते हैं यह रोगनाशक विशेष देवी मंत्र -

जयंती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी।

दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोस्तुते।।

-  धार्मिक मान्यता है कि नवरात्रि के अलावा हर रोज भी इस मंत्र का यथसंभव 108 बार जप तन, मन व स्थान की पवित्रता के साथ करने से संक्रामक रोग सहित सभी गंभीर बीमारियों का भी अंत होता है। घर-परिवार रोगमुक्त होता है।

इस मंत्र जप के पहले देवी की पूजा पारंपरिक पूजा सामग्रियों से जरूर करें। जिनमें गंध, फूल, वस्त्र, फल, नैवेद्य शामिल हो। इतना भी न कर पाएं तो धूप व दीप जलाकर भी इस मंत्र का ध्यान कर आरती करना भी बहुत शुभ माना गया है।

गुप्त नवरात्रि

गुप्त नवरात्रि जगतजननी दुर्गा की उपासना से शक्ति और मनोरथ सिद्धि का विशेष काल माना गया है। इस बार यह शुभ काल 2 जुलाई से लेकर 10 जुलाई तक रहेगा। शास्त्रों के मुताबिक संसार में प्राणी, वनस्पति, ग्रह-नक्षत्र सभी में दिखाई देने वाली या अनुभव होने वाली हर तरह की शक्तियां आदिशक्ति का ही स्वरूप है। यह आदिशक्ति ही ब्रह्मरूप है।

वेदों में जगतजननी जगदंबा द्वारा स्वयं कहा गया है कि वह ही पूरे ब्रह्मांड की अधिष्ठात्री है। इसलिए सभी कर्मफल और सुख-समृद्धि मेरे द्वारा ही प्रदान किए जाते हैं।

अगर आप भी जीवन से जुड़ी इच्छाओं जैसे धन, पद, संतान या सम्मान को पूरा करना चाहते हैं तो यहां बताए जा रहे देवी दुर्गा के एक मंत्र का जप गुप्त नवरात्रि, शुक्रवार, नवमी तिथि पर जरूर करें। यह मंत्र सरल है और पारंपरिक धार्मिक कार्यों में भी स्मरण किया जाता है।

जानते हैं यह मंत्र और देवी उपासना की सरल विधि -

- गुप्त नवरात्रि में सुबह या विशेष रूप से रात्रि में दिन के मुताबिक देवी के अलग-अलग स्वरूपों का ध्यान कर सामान्य पूजा सामग्री अर्पित करें।

- पूजा में लाल गंध, लाल फूल, लाल वस्त्र, आभूषण, लाल चुनरी चढ़ाकर फल या चना-गुड़ का भोग लगाएं। धूप व दीप जलाकर माता के नीचे लिखे मंत्र का नौ ही दिन कम से कम एक माला यानी 108 बार जप करना बहुत ही मंगलकारी होता है -

सर्व मंगलमांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके ।

शरण्ये त्र्यंबके गौरि नारायणि नमोस्तुते।।

- मंत्र जप के बाद देवी की आरती करें और मंगल कामना करते हुए अपनी समस्याओं को दूर करने के लिये मन ही मन देवी से प्रार्थना करें।

गुप्त नवरात्रि:

हिंदू पंचांग के अनुसार आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा (इस बार 2 जुलाई, शनिवार) से गुप्त नवरात्रि प्रारंभ हो रही है, जिसका समापन आषाढ़ शुक्ल दशमी (10 जुलाई, रविवार) को होगा। धर्म ग्रंथों के अनुसार गुप्त नवरात्रि में प्रमुख रूप से भगवान शंकर व देवी शक्ति की आराधना की जाती है। इनकी आराधना करने से गुप्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं। इन दिनों किए जाने वाले टोने-टोटके भी बहुत प्रभावशाली होते हैं, जिनके माध्यम से कोई भी मनोकामना पूर्ति कर सकता है। गुप्त नवरात्रि में किए जाने वाले कुछ टोटके इस प्रकार हैं-

1- यदि लड़की के विवाह में बाधा आ रही है तो गुप्त नवरात्रि में पडऩे वाले गुरुवार (इस बार 7 जुलाई) के दिन केले की जड़ थोड़ी काटकर ले आएँ और इसे पीले कपड़े में बांधकर लड़की के गले में बांध दें। शीघ्र ही विवाह हो जाएगा।

2- यदि आपके बच्चे को अक्सर नजर लगती है तो नवरात्रि में हनुमानजी के मंदिर में जाकर हनुमानचालीसा का पाठ करें और दाहिने पैर का सिंदूर बच्चे के मस्तक पर लगाएं। बच्चे को नजर नहीं लगेगी।

3- यदि नौकरी नहीं मिल रही है तो भैरवजी के मंदिर जाकर प्रार्थना करें व नैवेद्य चढ़ाएं। इससे नौकरी से संबंधित आपकी सभी समस्याएं हल हो जाएंगी।

4- शत्रुओं की संख्या बढ़ गई है और उनसे भय लगने लगा है तो नवरात्रि में प्रतिदिन भगवान नृसिंह के मंदिर में जाकर उनका दर्शन करें व पूजन करें।

5- धन प्राप्ति के लिए लक्ष्मी-नारायण के मंदिर में जाकर खीर व मिश्री का प्रसाद चढ़ाएं व शुक्रवार के दिन 9 वर्ष तक की कन्याओं को उनकी पसंद का भोजन कराएं। हो सके तो उन्हें कुछ उपहार भी दें।

6- पीपल के पत्ते पर राम लिखकर तथा कुछ मीठा रखकर हनुमान मंदिर में चढ़ाएं। इससे भी धन लाभ होने लगेगा।

7- भगवान शंकर आरोग्य के देवता है। नवरात्रि में उन्हें प्रतिदिन सुबह एक लोटा जल चढ़ाएं और रोग निवारण के लिए प्रार्थना करें। शीघ्र ही आपके स्वास्थ्य में लाभ होगा।

Wednesday, May 11, 2011

मां बगलामुखी जयंती


देवी बगलामुखी तंत्र की देवी है। तंत्र साधना में सिद्धि प्राप्त करने के लिए पहले देवी बगलामुखी को प्रसन्न करना पड़ता है। धर्म ग्रंथों के अनुसार वैशाख शुक्ल अष्टमी को माता बगलामुखी का प्राकट्य दिवस माना जाता है। इसे मां बगलामुखी जयंती कहते हैं। इस बार यह पर्व 11 मई, बुधवार को है।
आज  दिन (11 मई, बुधवार) साधक को माता बगलामुखी की निमित्त व्रत एवं उपवास करना चाहिए तथा देवी का पूजन करना चाहिए। देवी बगलामुखी स्तंभव शक्ति की अधिष्ठात्री हैं अर्थात यह अपने भक्त के शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों को रोक देती हैं। देवी बगलामुखी का एक नाम पीताम्बरा भी है। इसका कारण है कि इनका रंग सोने के समान पीला है। इन्हें पीला रंग अति प्रिय है इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। साधक को माता बगलामुखी की आराधना करते समय पीले वस्त्र ही धारण करना चाहिए।
यह विद्या शत्रु का नाश करने में अद्भुत है, वहीं कोर्ट, कचहरी में, वाद-विवाद में भी विजय दिलाने में सक्षम है। इसकी साधना करने वाला साधक सर्वशक्ति सम्पन्न हो जाता है। उसके मुख का तेज इतना हो जाता है कि उससे आँखें मिलाने में भी व्यक्ति घबराता है। आँखों में तेज बढ़ेगा, आपकी ओर कोई निगाह नहीं मिला पाएगा एवं आपके सभी उचित कार्य सहज होते जाएँगे। सामनेवाले विरोधियों को शांत करने में इस विद्या का अनेक राजनेता अपने ढंग से इस्तेमाल करते हैं। यदि इस विद्या का सदुपयोग किया जाए तो हित होगा। हम यहाँ पर सर्वशक्ति सम्पन्न बनाने वाली सभी शत्रुओं का शमन करने वाली, कोर्ट में विजय दिलाने वाली, अपने विरोधियों का मुँह बंद करने वाली भगवती बगलामुखी की आराधना साधना  दे रहे हैं।
गुरु दिक्षा लेकर मंत्र का सही विधि द्वारा जाप किया जाए तो वह मंत्र निश्चित रूप से सफलता दिलाने में सक्षम होता है।
इस साधना में विशेष सावधानियाँ रखने की आवश्यकता होती है । इस साधना को करने वाला साधक पूर्ण रूप से शुद्ध होकर (तन, मन, वचन) रात्री काल में पीले वस्त्र पहनकर व पीला आसन बिछाकर, पीले पुष्पों का प्रयोग कर, पीली (हल्दी या हकीक ) की 108 दानों की माला द्वारा मंत्रों का सही उच्चारण करते हुए कम से कम 11 माला का नित्य जाप 21 दिनों तक या कार्यसिद्ध होने तक करे या फिर नित्य 108 बार मंत्र जाप करने से भी आपको अभीष्ट सिद्ध की प्राप्ति होगी।खाने में पीला खाना व सोने के बिछौने को भी पीला रखना साधना काल में आवश्यक होता है वहीं नियम-संयम रखकर ब्रह्मचारीय होना भी आवश्यक है।
संक्षिप्त साधना विधि, छत्तीस अक्षर के मंत्र का विनियोग ऋयादिन्यास, करन्यास, हृदयाविन्यास व मंत्र इस प्रकार है--

विनियोग

ऊँ अस्य श्री बगलामुखी मंत्रस्य नारद ऋषिः, त्रिष्टुप छंदः श्री बगलामुखी देवता ह्लीं बीजं स्वाहा शक्तिः प्रणवः कीलकं ममाभीष्ट सिद्धयार्थे जपे विनियोगः।

ऋष्यादि न्यास-

नारद ऋषये नमः शिरसि, त्रिष्टुय छंद से नमः मुखे, बगलामुख्यै नमः, ह्मदि, ह्मीं बीजाय नमः गुहये, स्वाहा शक्तये नमः पादयो, प्रणवः कीलकम नमः सर्वांगे।

हृदयादि न्यास

ऊँ ह्लीं हृदयाय नमः बगलामुखी शिरसे स्वाहा, सर्वदुष्टानां शिरवायै वषट्, वाचं मुखं वदं स्तम्भ्य कवचाय हु, जिह्वां भीलय नेत्रत्रयास वैषट् बुद्धिं विनाशय ह्लीं ऊँ स्वाःआ फट्।

ध्यान

मध्ये सुधाब्धि मणि मंडप रत्नवेघां
सिंहासनो परिगतां परिपीत वर्णाम्।
पीताम्बरा भरणमाल्य विभूषितांगी
देवीं भजामि घृत मुदग्र वैरिजिह्माम ।।

मंत्र इस प्रकार है--

ऊँ ह्लीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्लीं ऊँ फट स्वाहा।
मंत्र जाप लक्ष्य बनाकर किया जाए तो उसका दशांश होम करना चाहिए। जिसमें चने की दाल, तिल एवं शुद्ध घी का प्रयोग करें एवं समिधा में आम की सूखी लकड़ी या पीपल की लकड़ी का भी प्रयोग कर सकते हैं। मंत्र जाप पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख कर करना चाहिए।

Monday, April 04, 2011

विक्रम संवत् 2068 शुभ हो। नव संवत्‍सर की शुभकामनाएँ

भारतीय नव वर्ष 2068 'संवत्‍सर' पर आप सब को बहुत बहुत बधाई। नववर्ष सुख समृद्धि और वैभव ले कर आपके भविष्‍य, आपके विचारों और आपके परिवार, मित्रों और सहयोगियों के साथ आपको उच्‍च से उच्‍चतम स्‍तर तक पहुँचाये। आप पर्यावरण, वृक्षारोपण, महँगाई नियंत्रण और जनजीवन सुरक्षा के लिए प्रयत्‍नशील रहें। मनोबल बढ़ायें, बच्‍चों को नई दिशाएँ देने के लिए पहल करें। राष्‍ट्रभाषा-मातृभाषा हिन्‍दी के चहुँमुखी प्रचार प्रसार के लिए आगे आयें। कुछ कर गुजरें, ताकि आप देश के लिए योगदान में स्‍वयं संतोष अनुभव करें और भावी पीढ़ी आपका अनुसरण, अनुकरण करे। आप उनका प्रतिनिधित्‍व करें। कोई माँ के पेट से सीख कर नहीं आता। हम अपने चारों ओर सृजित वातावरण, पारिवारिक परिस्थितियों और सहयोगियों के साथ सत्‍संग, समागम और विचारों से ही अपना और अपने परिवार का विकासोन्‍मुख वातावरण सृजित करते हैं। इसलिए इस नववर्ष पर कुछ नया कर गुजरें और मुझे लिखें कि आपने पिछले वर्ष क्‍या नया किया? कितना संतोष मिला? इस वर्ष क्‍या कुछ नया करने का विचार है? अगले नव वर्ष पर फि‍र मिलेंगे। पुन: शभकामनाएँ।