शास्त्रों के अनुसार सुख हो दुख हर पल भगवान का ध्यान करने पर अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, जो कि हमारे कई जन्मों पापों को नष्ट कर देता है। आजकल की भागती-दौड़ती जिंदगी में बहुत कम लोग हैं जिन्हें विधिवत भगवान की पूजा-आराधना का समय मिल पाता है। ऐसे में भगवान की पूजा के लिए सभी मंदिर जाते हैं और केवल हाथ जोड़कर प्रार्थना करते हैं। जबकि भगवान के सामने साष्टांग प्रणाम करने पर आश्चर्यजनक शुभ फल प्राप्त होते हैं।
भगवान को साष्टांग प्रणाम करना, केवल एक परंपरा या बंधन नहीं है। इस परंपरा के पीछे विज्ञान भी है जो हमारे शारीरिक, मानसिक और वैचारिक विकास से जुड़ा है। साष्टांग प्रणाम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे हमारे शरीर का व्यायाम होता है। साष्टांग प्रणाम की बहुत ही सामान्य विधि हैं। इसके लिए भगवान के सामने आराम से बैठ जाएं और फिर धीरे-धीरे पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों हाथों को सिर के आगे ले जाकर जोड़कर नमस्कार करें। इस प्रणाम से हमारे सारे जोड़ थोड़ी देर के लिए तन जाते हैं, इससे भी स्ट्रेस दूर होता है। इसके अलावा झुकने से सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो स्वास्थ्य और आंखों के लिए लाभप्रद होता है। प्रणाम करने की यही विधि सबसे ज्यादा फायदेमंद है। इसका धार्मिक महत्व काफी गहरा है ऐसा माना जाता है कि इससे हमारा अहंकार कम होता है। भगवान के प्रति हमारे मन में समर्पण का भाव आता है तो अहंकार स्वत: ही खत्म होता है। जब भगवान के समक्ष हम तन और मन समर्पण कर देते हैं तो यह अवस्था निश्चित ही हमारे मन को असीम शांति प्रदान करती हैं। इसके अलावा इस प्रकार प्रणाम करने से हमारे जीवन की कई समस्याएं स्वत: ही समाप्त हो जाती हैं।
भगवान को साष्टांग प्रणाम करना, केवल एक परंपरा या बंधन नहीं है। इस परंपरा के पीछे विज्ञान भी है जो हमारे शारीरिक, मानसिक और वैचारिक विकास से जुड़ा है। साष्टांग प्रणाम का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे हमारे शरीर का व्यायाम होता है। साष्टांग प्रणाम की बहुत ही सामान्य विधि हैं। इसके लिए भगवान के सामने आराम से बैठ जाएं और फिर धीरे-धीरे पेट के बल जमीन पर लेट जाएं। दोनों हाथों को सिर के आगे ले जाकर जोड़कर नमस्कार करें। इस प्रणाम से हमारे सारे जोड़ थोड़ी देर के लिए तन जाते हैं, इससे भी स्ट्रेस दूर होता है। इसके अलावा झुकने से सिर में रक्त प्रवाह बढ़ता है, जो स्वास्थ्य और आंखों के लिए लाभप्रद होता है। प्रणाम करने की यही विधि सबसे ज्यादा फायदेमंद है। इसका धार्मिक महत्व काफी गहरा है ऐसा माना जाता है कि इससे हमारा अहंकार कम होता है। भगवान के प्रति हमारे मन में समर्पण का भाव आता है तो अहंकार स्वत: ही खत्म होता है। जब भगवान के समक्ष हम तन और मन समर्पण कर देते हैं तो यह अवस्था निश्चित ही हमारे मन को असीम शांति प्रदान करती हैं। इसके अलावा इस प्रकार प्रणाम करने से हमारे जीवन की कई समस्याएं स्वत: ही समाप्त हो जाती हैं।








मातृभाषा हिन्दी के चहुँमुखी प्रचार प्रसार के लिए आगे आयें। कुछ कर गुजरें, ताकि आप देश के लिए योगदान में स्वयं संतोष अनुभव करें और भावी पीढ़ी आपका अनुसरण, अनुकरण करे। आप उनका प्रतिनिधित्व करें। कोई माँ के पेट से सीख कर नहीं आता। हम अपने चारों ओर सृजित वातावरण, पारिवारिक परिस्थितियों और सहयोगियों के साथ सत्संग, समागम और विचारों से ही अपना और अपने परिवार का विकासोन्मुख वातावरण सृजित करते हैं। इसलिए इस नववर्ष पर कुछ नया कर गुजरें और मुझे लिखें कि आपने पिछले वर्ष क्या नया किया? कितना संतोष मिला? इस वर्ष क्या कुछ नया करने का विचार है? अगले नव वर्ष पर फिर मिलेंगे। पुन: शभकामनाएँ।

